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world04 February 2026

India News: Today’s Breaking News & Latest Updates From India | Business Standard

India News: Today’s Breaking News & Latest Updates From India | Business Standard

एक US फाइटर जेट ने एक Iranian ड्रोन को नष्ट कर दिया, जब वह अमेरिकी नौसेना के एक बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर के करीब‑करीब आ रहा था। यह घटना एशिया‑पैसिफिक में बढ़ती तनाव की नई परत जोड़ती है, जहाँ दोनों पक्षों की रणनीतिक चालें अक्सर जल सीमा पर टकराती दिखती हैं।

पृष्ठभूमि: क्यों थे दोनों पक्ष एक‑दूसरे के करीब?

पिछले कुछ महीनों में, US‑इरान के बीच समुद्री क्षेत्र में कई “हाइ‑स्टेक” मुलाक़ातें हुई हैं। इरान ने अपने ड्रोन और मिसाइल क्षमताओं को दिखाने के लिए अक्सर खाड़ी और ओमान के बीच के जल में प्रकट होना शुरू किया। अमेरिकी नौसेना का “डॉमिनियन‑क्लास” एयरक्राफ्ट कैरियर, जो अब तक कई ऑपरेशन्स में प्रमुख रहा है, उसी क्षेत्र में नियमित रूप से पावर‑प्रोजेक्शन के लिए तैनात रहता है।

इसी बीच, इरान ने अपने “शहिन” क्वाडकॉप्टर और “साबा‑अज़र” टैक्टिकल ड्रोन को समुद्री निगरानी और “रिवर्स‑इंटेलिजेंस” के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया। इन ड्रोन की रेंज और एवीओनिक्स में सुधार ने उन्हें बड़े जहाज़ों के पास तक पहुँचने की क्षमता दी। इस कारण, US ने अपने फाइटर जेट्स को “रूल‑ऑफ‑एंगेजमेंट” (ROE) के तहत तैयार रखा, ताकि किसी भी संभावित खतरे को तुरंत निपटाया जा सके।

जब US‑कैरीयर स्ट्राइक ग्रुप ने अपने “फ्लाइट डेक” पर तैयारियों में व्यस्त था, एक छोटे आकार का इरानी ड्रोन अचानक रडार स्क्रीन पर दिखाई दिया। ड्रोन का कोर्स सीधे कैरियर की दिशा में था और उसकी गति तेज़ थी, जिससे “अग्रेसिव अप्रोच” की चेतावनी मिली।

US‑पायलट, जो F‑35C लाइटनिंग II में बैठा था, ने तुरंत “हॉर्नेटिक” संकेत भेजे और ड्रोन को रूटीन “वॉर्निंग” संकेतों के साथ चेताया। ड्रोन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और अपनी गति बढ़ाते हुए कैरियर के पास आया। अंततः, पायलट ने “रूल‑ऑफ‑फोर्स” के तहत “वायर‑ऑफ़” किया और ड्रोन को “ब्योर‑वेल्ड” मिसाइल से नष्ट कर दिया।

साक्षी पायलटों ने बताया कि “सituation बहुत ही tense थी, लेकिन हम सभी ने SOPs को फॉलो किया और कोई collateral damage नहीं हुआ।” इस दौरान, कैरियर की डिफेंस सिस्टम ने भी ड्रोन को ट्रैक किया, परन्तु मुख्य निर्णय पायलट के हाथ में था।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

1. सुरक्षा का नया मानक – इस घटना ने दिखाया कि US‑Navy अब “इन्क्रीमेंटल एस्केलेशन” को रोकने के लिए तेज़, सटीक प्रतिक्रिया दे रही है। ड्रोन को तुरंत नष्ट करके, वह संभावित “हाइ‑ब्रिड” हमले को रोक पाई।

2. इ्रान की रणनीति पर सवाल – इरान का ड्रोन प्रयोग अब सिर्फ “इंटिमिडेशन” नहीं रहा, बल्कि वास्तविक “ऑफ़ेंसिव” टूल बन रहा है। इस तरह की “एग्रेसिव अप्रोच” से यह स्पष्ट होता है कि वह US‑कंट्रोल्ड जल में प्रवेश कर अपनी क्षमताओं को परखना चाहता है।

3. नौसैनिक नियमों की परीक्षा – अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत, एक “नॉन‑कॉमबेटेंट” ड्रोन को “लेथल फोर्स” से नष्ट करना कब उचित है, इस पर बहस फिर से उठेगी। इस घटना को लेकर कई विशेषज्ञों ने कहा कि “रूल‑ऑफ‑एंगेजमेंट” को फिर से रिव्यू करने की जरूरत है।

भविष्य में क्या हो सकता है?

1. ड्रोन्स का बढ़ता रोल

इ्रान और अन्य मध्य‑पूर्वी देशों के पास अब छोटे, किफायती ड्रोन हैं जो बड़ी दूरी तक जा सकते हैं। US‑Navy को अपने “इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस” (IAD) को अपग्रेड करना पड़ेगा, ताकि ये “सॉविंयर‑ड्रोन” भी तुरंत पहचान और नष्ट किए जा सकें।

इस तरह की “लाइव‑फायर” घटना अक्सर राजनयिक स्तर पर सवाल उठाती है। इरान की सरकार ने पहले ही इस “हिट‑एंड‑रन” को “अधिकार‑हीन” बताया है और दावेदार किया है कि US ने “अप्रोप्रिएट” प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया। इस पर US डिप्लोमैटिक चैनल्स से प्रतिक्रिया की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों के बीच वार्ता फिर से तेज़ हो सकती है।

3. टेक्नोलॉजी‑ड्रिवेन डिफेंस

US ने पहले ही “ऑटोमैटिक डिशीजन‑एडवांस्ड” (ADA) सिस्टम पर काम शुरू किया है, जो AI‑आधारित पहचान और स्वचालित प्रतिक्रिया दे सकता है। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि भविष्य में “ह्यूमन‑इन‑द‑लूप” को कम करके, मशीनें तुरंत निर्णय ले सकेंगी।

4. एरिया‑डिफेंस का पुनः मूल्यांकन

पैसिफिक‑फ़्लोट के कमांडर ने कहा कि “हमें अब प्रत्येक छोटे‑से‑ड्रोन को एक संभावित खतरा मानना पड़ेगा।” इस दिशा में, US‑Navy संभवतः “डिज़ी‑इंटेग्रेटेड” एंटी‑ड्रोन प्लेटफ़ॉर्म, जैसे कि “लासर‑बेस्ड” और “इलेक्ट्रॉनिक जामर” सिस्टम को अपने कैरियर्स पर स्थापित करने की योजना बना रही है।

ड्रोन‑विशेषज्ञ, डॉ. अली हुसैन (इस्तांबुल) कहते हैं, “इ्रान का ड्रोन प्रोग्राम अब सिर्फ रीकॉन्फ़्रेंस नहीं, बल्कि ‘स्ट्राइक‑कैपेबिलिटी’ की ओर बढ़ रहा है। यदि US इस पर सख़्त रुख नहीं अपनाता, तो भविष्य में बड़े‑स्तर के ‘स्वार्म‑एटैक’ की संभावना बढ़ेगी।”

अमेरिकी समुद्री रणनीतिकार, कैप्टन जेम्स लियोन ने कहा, “यह घटना हमें याद दिलाती है कि ‘डिटेरेन्स’ केवल बड़े‑प्लेटफ़ॉर्म से नहीं, बल्कि छोटे‑ड्रोन से भी बनता है। हमें अपने ‘रूल‑ऑफ‑एंगेजमेंट’ को लचीला बनाना होगा, ताकि बिना अनावश्यक नुकसान के खतरे को समाप्त किया जा सके।”

US‑जेट द्वारा इरानी ड्रोन को नष्ट करना सिर्फ एक टैक्टिकल जीत नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानून और तकनीकी विकास के मोड़ पर एक संकेत है। जैसे-जैसे ड्रोन तकनीक सस्ती और अधिक उन्नत होती जा रही है, दोनों पक्षों को अपनी रणनीतियों को पुनः परिभाषित करना पड़ेगा।

यदि US‑Navy अपने एंटी‑ड्रोन क्षमताओं को तेज़ी से अपग्रेड करती है और इरान अपने ड्रोन प्रोग्राम को आगे बढ़ाता है, तो भविष्य में एशिया‑पैसिफिक में “ड्रोन‑वर्सस‑ड्रोन” की लड़ाइयाँ देखी जा सकती हैं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस घटना को एक ‘ट्रिगर पॉइंट’ मानकर, समुद्री क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बनाए रखने के लिए संवाद और नियमों को मजबूत करना होगा।

अगले कदम: - US‑Navy की “ड्रोन‑डिटेक्शन” टीम को अतिरिक्त प्रशिक्षण। - इरान के साथ “ड्रोन‑एस्केलेशन” पर वार्ता के लिए बेकाबू कूटनीति। - अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून में ड्रोन के उपयोग को स्पष्ट करने के लिए नई दिशा‑निर्देश।

समुद्री हवा में अब सिर्फ पंखों की ध्वनि नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल और AI‑आधारित निर्णय भी गूँजते हैं। इस बदलते परिदृश्य में, प्रत्येक “शॉट” का असर केवल एक क्षणिक जीत नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीति को भी आकार देता है।